डरें नहीं, समझें! मानसून में क्यों निकलते हैं सांप और कैसे रहें सुरक्षित?

पुणे, मानसून की शुरुआत होते ही सांपों के निकलने की घटनाएं काफी बढ़ जाती हैं. लेकिन, यह केवल एक गलतफहमी है कि सांप इंसानों पर हमला करने बाहर आते हैं. दरअसल, बारिश के कारण बिलों में पानी भरने से वे सुरक्षित स्थानों की तलाश में बाहर निकलते हैं. इसी समय चूहे, मेंढक और छिपकलियों जैसे उनके शिकार भी इंसानी बस्तियों के करीब आ जाते हैं, जिससे सांप भी वहां खिंचे चले आते हैं. ‘विश्व सर्प दिवस’ (16 जुलाई) के अवसर पर सर्प मित्रों ने लोगों से अपील की है कि वे सांपों से डरने के बजाय सही जानकारी अपनाकर सह-अस्तित्व का मार्ग चुनें.
‘फॉरेस्ट’ (फ्रेंड्स ऑफ रेप्टाइल्स एंड एनवायर्नमेंटल सेविंग ट्रस्ट) के सर्प मित्र सागर बावले ने बताया कि वन्यजीव और मानव के बीच संघर्ष को कम करने के लिए वे निरंतर सक्रिय हैं. उनके ट्रस्ट ने साल 2024 में 978 और 2025 में 899 सांपों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ा है. वहीं, आईयूसीएन (IUCN) वाइपर स्पेशलिस्ट ग्रुप के सदस्य और हर्पेटोलॉजिस्ट निर्मल कुलकर्णी के अनुसार, “जैसे हम अपने आसपास पक्षियों और कीड़ों का अस्तित्व स्वीकार करते हैं, वैसे ही हमें सांपों के अस्तित्व को भी स्वीकारना होगा.”
सुरक्षा के लिए क्या करें और क्या न करें:
सांप दिखने पर शांत रहें, उसे जाने का रास्ता दें, तुरंत दूरी बना ले और तुरंत सर्प मित्र या वन विभाग से संपर्क करें.
सांप दीवारों के सहारे चलते हैं, इसलिए बिस्तर कमरे के बीच में लगाएं, दीवार से सटाकर नहीं.
घर के आसपास झाड़ियां, कचरा, पत्थरों और लकड़ियों का ढेर न जमा होने दें. रात में बाहर निकलते समय हमेशा टॉर्च का उपयोग करें.
सांप को मारने या खुद पकड़ने की कोशिश न करें. उनके पास जाकर फोटो या वीडियो न बनाएं.
सर्पदंश (सांप काटने) पर झाड़-फूंक या तंत्र-मंत्र में समय गंवाए बिना मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाएं.
